सगड़ी क्षेत्र के महुला गांव में एक माह से ट्रांसफार्मर जला पड़ा है। इससे पहले ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांधी के आंदोलन में उनका भी भला हो जाएगा लेकिन जब उन्हें पता चला कि पुलिस ने गांधी को जेल भेज दिया है तो ग्रामीणों ने खुद सड़क पर उतरना मुनासिब समझा और शनिवार को जले ट्रांसफार्मर के पास जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान गांधी जिंदाबाद का नारा भी लगा। इस मौके पर नागेन्द्र राय, मदन गुप्ता, कन्हैया गुप्ता, हरीलाल गुप्ता, भगेलू यादव, रामसकल सोनकर, जगदीश सोनकर, बेचू चौहान, गुजराती, बदामी, मीना, सरोज, गुड्डी, गिरजा आदि उपथित थीं।
बिजली संकट के आंदोलन में जुड़ा गांधी का नाम
सगड़ी क्षेत्र के महुला गांव में एक माह से ट्रांसफार्मर जला पड़ा है। इससे पहले ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांधी के आंदोलन में उनका भी भला हो जाएगा लेकिन जब उन्हें पता चला कि पुलिस ने गांधी को जेल भेज दिया है तो ग्रामीणों ने खुद सड़क पर उतरना मुनासिब समझा और शनिवार को जले ट्रांसफार्मर के पास जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान गांधी जिंदाबाद का नारा भी लगा। इस मौके पर नागेन्द्र राय, मदन गुप्ता, कन्हैया गुप्ता, हरीलाल गुप्ता, भगेलू यादव, रामसकल सोनकर, जगदीश सोनकर, बेचू चौहान, गुजराती, बदामी, मीना, सरोज, गुड्डी, गिरजा आदि उपथित थीं।
'गांधी तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं'
यहां हुई संक्षिप्त सभा में गांधी ने कहा कि हम तो अपने दम पर पहले से जनता के लिए लड़ रहे हैं। अब तो कार्यकर्ताओं के स्वागत ने हमारी ऊर्जा को और बढ़ा दिया है। आगे की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई भी फैसला अब कार्यकर्ताओं से सलाह लेने के बाद लिया जाएगा। रहा सवाल हमारे साथ प्रशासन के व्यवहार का, तो प्रशासन ने हमारे साथ धोखा किया। हमें एसडीएम कोर्ट में पेश भी नहीं किया गया और यह कहकर अस्पताल से ले जाया गया कि घर पहुंचाना है। रास्ते में जेल के पास उतारकर जेल में दाखिल करा दिया गया। दिग्विजय ने जेल अधिकारियों की प्रशंसा की कि मेरे साथ इतना अच्छा बर्ताव किया गया कि लगा ही नहीं कि हम जेल में हैं।
स्वागत के दौरान पार्टी के संयोजक राजेश यादव एडवोकेट, भीम यादव एडवोकेट, अरविंद मिश्रा, मीडिया प्रभारी आलोक तिवारी, सचिव कमलेश सिंह, विनोद यादव, संजय सिंह, उमेश, संजय दुबे, रामचंदर आदि उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर से कहा कि प्रशासन ने जो भी किया वह उचित नहीं था। संगठन आगे की रणनीति तय करने के लिए शनिवार को सिधारी स्थित कार्यालय पर बैठक करेगा।
अस्पताल में भर्ती गांधी को पुलिस ने भेजा जेल
आजमगढ़ : लाटघाट बाजार में विद्युत संकट के खिलाफ आमरण अनशन करने वाले दिग्विजय गांधी को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बिजली विभाग से उनकी मांग पूरी कराने में लाचार पुलिस की इस कार्रवाई पर तरौका गांव में गुस्सा पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का हर बच्चा दिग्विजय बनने को तैयार है और उनकी जिम्मेदारी हर ग्रामीण निभाने के लिए खड़ा है। फिलहाल जो बातें आ रही हैं उसमें बवाल की संभावना बढ़ती दिख रही है। विद्युत संकट को लेकर तरौका गांव के दिग्विजय गांधी ने लाटघाट बाजार में शनिवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया था।
उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुवार को तड़के पुलिस ने जबरन उठाकर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने अनशन नहीं तोड़ा। यहां तक कि पुलिस को चकमा देकर एक बार फिर वह अस्पताल से निकलकर लाटघाट की ओर भागने लगे लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां भी वह अनशन तोड़ने को तैयार नहीं हुए। उधर पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने के बाद लाटघाट क्षेत्र में हुई प्रतिक्रिया को पुलिस ने गंभीरता से लिया और लगा कि गांधी के चलते क्षेत्र में शांति व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो सकता है तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर एसडीएम सगड़ी के न्यायालय में पेश किया। वहां उन्होंने मुचलका भरने से इंकार कर दिया। कहा कि हम कोई अपराधी नहीं हैं कि जमानत मांगे। उसके बाद पुलिस ने उन्हें जेल में पहुंचा दिया।
जेल पहुंचने पर दिग्विजय गांधी रो पड़े। बोले आजाद भारत में भी हमारे जैसे गांधी को जेल भेजा जा रहा है। हमने कोई अपराध नहीं किया, हमने जो भी किया वह जनता के लिए किया। फिर भी हमें जेल भेजा जा रहा है। जेल सूत्रों के मुताबिक गांधी ने अधिकारियों के समझाने पर सुबह का भोजन ग्रहण कर लिया। उनकी खराब सेहत को देखते हुए जेल के अस्पताल में रखा गया है।
उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुवार को तड़के पुलिस ने जबरन उठाकर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने अनशन नहीं तोड़ा। यहां तक कि पुलिस को चकमा देकर एक बार फिर वह अस्पताल से निकलकर लाटघाट की ओर भागने लगे लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां भी वह अनशन तोड़ने को तैयार नहीं हुए। उधर पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने के बाद लाटघाट क्षेत्र में हुई प्रतिक्रिया को पुलिस ने गंभीरता से लिया और लगा कि गांधी के चलते क्षेत्र में शांति व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो सकता है तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर एसडीएम सगड़ी के न्यायालय में पेश किया। वहां उन्होंने मुचलका भरने से इंकार कर दिया। कहा कि हम कोई अपराधी नहीं हैं कि जमानत मांगे। उसके बाद पुलिस ने उन्हें जेल में पहुंचा दिया।
जेल पहुंचने पर दिग्विजय गांधी रो पड़े। बोले आजाद भारत में भी हमारे जैसे गांधी को जेल भेजा जा रहा है। हमने कोई अपराध नहीं किया, हमने जो भी किया वह जनता के लिए किया। फिर भी हमें जेल भेजा जा रहा है। जेल सूत्रों के मुताबिक गांधी ने अधिकारियों के समझाने पर सुबह का भोजन ग्रहण कर लिया। उनकी खराब सेहत को देखते हुए जेल के अस्पताल में रखा गया है।
Subscribe to:
Comments (Atom)