आजमगढ़ : लाटघाट बाजार में विद्युत संकट के खिलाफ आमरण अनशन करने वाले दिग्विजय गांधी को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बिजली विभाग से उनकी मांग पूरी कराने में लाचार पुलिस की इस कार्रवाई पर तरौका गांव में गुस्सा पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का हर बच्चा दिग्विजय बनने को तैयार है और उनकी जिम्मेदारी हर ग्रामीण निभाने के लिए खड़ा है। फिलहाल जो बातें आ रही हैं उसमें बवाल की संभावना बढ़ती दिख रही है। विद्युत संकट को लेकर तरौका गांव के दिग्विजय गांधी ने लाटघाट बाजार में शनिवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया था।
उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुवार को तड़के पुलिस ने जबरन उठाकर जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने अनशन नहीं तोड़ा। यहां तक कि पुलिस को चकमा देकर एक बार फिर वह अस्पताल से निकलकर लाटघाट की ओर भागने लगे लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां भी वह अनशन तोड़ने को तैयार नहीं हुए। उधर पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने के बाद लाटघाट क्षेत्र में हुई प्रतिक्रिया को पुलिस ने गंभीरता से लिया और लगा कि गांधी के चलते क्षेत्र में शांति व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो सकता है तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर एसडीएम सगड़ी के न्यायालय में पेश किया। वहां उन्होंने मुचलका भरने से इंकार कर दिया। कहा कि हम कोई अपराधी नहीं हैं कि जमानत मांगे। उसके बाद पुलिस ने उन्हें जेल में पहुंचा दिया।
जेल पहुंचने पर दिग्विजय गांधी रो पड़े। बोले आजाद भारत में भी हमारे जैसे गांधी को जेल भेजा जा रहा है। हमने कोई अपराध नहीं किया, हमने जो भी किया वह जनता के लिए किया। फिर भी हमें जेल भेजा जा रहा है। जेल सूत्रों के मुताबिक गांधी ने अधिकारियों के समझाने पर सुबह का भोजन ग्रहण कर लिया। उनकी खराब सेहत को देखते हुए जेल के अस्पताल में रखा गया है।